Sharabi shayari hindi



वो अपनी नजरों से जाम पिलाएंगे
यही अरमां दिल में छुपाए बैठे हैं
पीने में मजा तो तब आता है यारों
जाम हम लगाएं और नशा उनको हो जाए


हम गम भुलाने के लिए शराब पी रहे थे
इसने तो हमारे ग़मों को और ताजा कर दिया


मत दोष दो शराब को
शराब का कोई कसूर नहीं
कसूर तो पीने वालों का है
जो शराब में उसका चेहरा तलाश करते हैं



ये रात मासूम है मगर दिल खामोश नहीं
आज पिया भी नहीं और फिर भी होश नहीं
शराब से ज्यादा नशा तो तेरी आंखों में है
मैं इन्हीं में डूबा रहा तेरा दोष नहीं




लोग कहते हैं कि मैं शराबी हूं
मैं कहता हूं कि वो मुझे आंखों से पिलाते हैं
लोग कहते हैं कि मैं आशिक हूं
मुझे आशिकी भी तो उन्हीं ने सिखाई है
लोग कहते हैं कि तू शायर बन गया है
अब लगता है कि उनकी मोहब्बत रंग लाई है


देवदास की तरह जिंदगी मत गुजारो
प्यार की ऐसी की तैसी यारों
ना चंद्रमुखी की बात मानो
ना पारो की बात मानो
रोज रात को एक बियर मारो
और मस्ती से जिंदगी गुजारो



महफिल सजी थी शराब की
सब हम को पिलाना चाहते थे
यारों के कहने पर हम इतनी पी गए
न अपनी चिंता की और न जमाने की

मुझे पीने का कोई खास शौक नहीं है
मैं तो तेरे छोड़ जाने के गम में पीता हूं
बहुत याद करता हूं वो हसीन लम्हे
वरना घुट-घुट के जीने का मुझे भी कोई शौक नहीं





Sharabi shayari 2 line



तेरी आंखों से बहुत सागर पिए है मैंने
यह शराब तो क्या खाक नशा करेगी

मत पियो इतनी शराब दोस्तों
यह तो सुबह उतर जाएगी
अरे पीना है तो दो घूंट बेवफा के पियो
पूरी जिंदगी नशे में गुजर जाएगी


रख ले दो चार बोतल कब्र में
साथ-साथ पिया करेंगे
खुदा मांगेगा जब हिसाब गुनाहों का
एकाद पेग उन्हें भी दिया करेंगे



Sharabi shayari 2 lines

शराब मेरे यार की दोस्ती के जैसी
हां यह अब न छोड़ी जाए



ये शराब तो मेरे दर्द की दवा है
इसे पीने में क्या खराबी है
लगती है जब चोट दिल में तो पी लेता हूं
वैसे में कोई शराबी नहीं।


तू देता जा जाम बना बना कर इन प्यालो में
 वो न निकल जाए जब तक मेरे ख्यालों से....


तू होश में भी हमें पहचान न पाई
एक मैं हूं जो नशे में भी तेरा नाम लेता रहता हूं



बदनाम हम कुछ इस कदर हो गए
कि हम पानी भी पिए तो लोग शराब समझते हैं


इन अदालतों को अब मयखानों में लगने दो
लोग कहते हैं कि नशे में कोई झूठ नहीं बोलता


वो लड़की बेवफा है ये शराब नहीं
मैं खराब हूं लेकिन दारु खराब नहीं


खयालों में आज उनका नाम आ गया
महफिल में गए तो हाथों में जाम आ गया
नशे में हम जब गिरे उनकी बाहों में जाकर
लगता है आज पीना भी काम आ गया


मत कर तमाशा पीकर मेरी गली में
हम तो वैसे ही बदनाम हैं तेरी मोहब्बत से

उसने दरिया को ऐसे छुआ कि
उसका पानी भी गुलाबी कर दीया
हम अपनी क्या बात करें
उसने तो मछलियों को भी शराबी कर दिया

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